शान्ति / शान्ति सूक्त (१९.९.१) वैदिक मंत्र
ॐ शान्ता द्यौः शान्ता पृथिवी शान्तमिदमुर्वन्तरिक्षम् । शान्ता उदन्वतीरापः शान्ता नः सन्त्वोषधयः ॥
ब्रह्माण्ड के सभी भौतिक स्तरों (आकाश, पृथ्वी, जल, औषधियों) में संतुलन, भय का निवारण एवं परम-शांति की स्थापना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्माण्ड के सभी भौतिक स्तरों (आकाश, पृथ्वी, जल, औषधियों) में संतुलन, भय का निवारण एवं परम-शांति की स्थापना।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्माण्ड के सभी भौतिक स्तरों (आकाश, पृथ्वी, जल, औषधियों) में संतुलन, भय का निवारण एवं परम-शांति की स्थापना
जाप विधि
किसी अनिष्ट की आशंका होने पर या प्राकृतिक आपदाओं के निवारण हेतु सामूहिक शांति-यज्ञ में आहुति के साथ सस्वर पाठ।
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मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥
bhakti mantraॐ नमो भगवते वासुदेवाय
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
mool mantraॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्यधिपतये धनधान्यसमृद्धिम मे देहि दापय स्वाहा
stotra mantraयस्य ब्रह्मादयो देवा वेदा लोकाश्चराचराः । नामरूपविभेदेन फल्ग्व्या च कलया कृताः ॥ 4
navgrah mantraॐ रां राहवे नमः