ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.३)

अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.३) वैदिक मंत्र

ॐ अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम् । अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम् ॥

यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि

जाप विधि

देव-पूजन एवं यज्ञ के आरम्भिक चरण में 'दूत' स्वरूप अग्नि का स्मरण करते हुए स्तुति पाठ एवं गान।

विशेष टिप्पणियाँ

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