अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.३) वैदिक मंत्र
ॐ अग्निं दूतं वृणीमहे होतारं विश्ववेदसम् । अस्य यज्ञस्य सुक्रतुम् ॥
यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि।
इस मंत्र से क्या होगा?
यज्ञीय कार्यों को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने हेतु अग्नि की मध्यस्थता सुनिश्चित करना एवं संकल्प सिद्धि
जाप विधि
देव-पूजन एवं यज्ञ के आरम्भिक चरण में 'दूत' स्वरूप अग्नि का स्मरण करते हुए स्तुति पाठ एवं गान।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
ugra mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ
tantrik mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा
naam mantraकेदारनाथ