सविता / गायत्री मंत्र (३.६२.१०) वैदिक मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
बुद्धि की शुद्धि, आत्मज्ञान की प्राप्ति, सत्य की ओर प्रेरणा एवं सार्वभौमिक शांति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
बुद्धि की शुद्धि, आत्मज्ञान की प्राप्ति, सत्य की ओर प्रेरणा एवं सार्वभौमिक शांति।
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धि की शुद्धि, आत्मज्ञान की प्राप्ति, सत्य की ओर प्रेरणा एवं सार्वभौमिक शांति
जाप विधि
त्रिकाल संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में पवित्र कुशासन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से न्यूनतम १०८ बार मानसिक या उपांशु जप।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं असितांग भैरवाय, सर्व शाप विमोचनाय, मम कार्यं कुरु कुरु स्वाहा
beej mantraद्रीं
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
siddh mantraॐ मं मूषिकायै गणाधिपवाहनाय धर्मराजाय स्वाहा ।
navgrah mantraॐ शुं शुक्राय नमः