विश्वेदेवा / स्वस्तिवाचन (२५.१४) वैदिक मंत्र
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना
जाप विधि
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, गृह-प्रवेश अथवा विवाह के शुभारम्भ में हाथ में पुष्प एवं अक्षत लेकर सस्वर गान।
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जय सियाराम
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा
siddh mantraॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
gyan mantraइदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
bhakti mantraॐ श्री त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4