ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
विश्वेदेवा / स्वस्तिवाचन (२५.१४)

विश्वेदेवा / स्वस्तिवाचन (२५.१४) वैदिक मंत्र

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥

सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारवैदिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्वकार्य सिद्धि, अमंगल का नाश, दसों दिशाओं का रक्षण एवं देव-शक्तियों से कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त करना

जाप विधि

किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, गृह-प्रवेश अथवा विवाह के शुभारम्भ में हाथ में पुष्प एवं अक्षत लेकर सस्वर गान।

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