श्री लक्ष्मी-नारायण / लक्ष्मीनारायण हृदय स्तोत्र स्तोत्र मंत्र
न मां त्यजेथाः श्रितकल्पवल्लि सद्भक्ति-चिन्तामणि-कामधेनो । न मां त्यजेथा भव सुप्रसन्ने गृहे कलत्रेषु च पुत्रवर्गे ॥ 27
दारिद्र्य व दुःख रूपी अंधकार का शमन, विज्ञान व सौभाग्य की वृद्धि, और घर में लक्ष्मी की स्थिर कृपा 27।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दारिद्र्य व दुःख रूपी अंधकार का शमन, विज्ञान व सौभाग्य की वृद्धि, और घर में लक्ष्मी की स्थिर कृपा 27।
इस मंत्र से क्या होगा?
दारिद्र्य व दुःख रूपी अंधकार का शमन, विज्ञान व सौभाग्य की वृद्धि, और घर में लक्ष्मी की स्थिर कृपा
जाप विधि
नियमित पारायण के रूप में पाठ करें 27।
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
gyan mantraआ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥
naam mantraवैश्वानर
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
tantrik mantraॐ श्रीं ग्लौं फट्
siddh mantraॐ ऐं क्लीं शीघ्र कार्य सिद्धय फट्