माता दुर्गा / दुर्गा सप्तशती (सिद्ध सम्पुट स्तोत्र) स्तोत्र मंत्र
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥ 24
जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा 24।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा 24।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा
जाप विधि
संपूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ के अंतर्गत ज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन में सम्पुट लगाकर जप करें 24।
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त्वमस्मिन् कार्य निर्योगे प्रमाणं हरि सत्तम । हनुमान यत्नमास्थाय दुःख क्षय करो भव ॥
beej mantraसुं
navgrah mantraॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥
jap mantraअंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा
dhyan mantraमनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4