ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माता दुर्गा / दुर्गा सप्तशती (सिद्ध सम्पुट स्तोत्र)

माता दुर्गा / दुर्गा सप्तशती (सिद्ध सम्पुट स्तोत्र) स्तोत्र मंत्र

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च॥ 24

जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा 24।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा 24।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

जीवन और शरीर की हर प्रकार से रक्षा

जाप विधि

संपूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ के अंतर्गत ज्ञानी गुरु के मार्गदर्शन में सम्पुट लगाकर जप करें 24।

विशेष टिप्पणियाँ

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धन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5

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