सिद्ध मातंगी उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण 5।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण
जाप विधि
कुलार्णव तंत्र व रुद्रयामल तंत्र के निर्देशानुसार, बिना गुरु दीक्षा और उचित संस्कार के इस वीर्यवान मंत्र का जप वर्जित है। सुयोग्य तंत्राचार्य के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में ही शास्त्रीय मर्यादा एवं आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करते हुए इसका अनुष्ठान किया जाना चाहिए 5।
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ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
kaamya mantraइन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्त्रप्रधनेषु च। उग्र उग्राभिरूतिभिः॥
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
naam mantraमत्स्यदेव
shanti mantraॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥