सिद्ध मातंगी उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण 5।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण 5।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण
जाप विधि
कुलार्णव तंत्र व रुद्रयामल तंत्र के निर्देशानुसार, बिना गुरु दीक्षा और उचित संस्कार के इस वीर्यवान मंत्र का जप वर्जित है। सुयोग्य तंत्राचार्य के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में ही शास्त्रीय मर्यादा एवं आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करते हुए इसका अनुष्ठान किया जाना चाहिए 5।
विशेष टिप्पणियाँ
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ॐ स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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