बटुक भैरव (सर्व कार्य सिद्ध स्वरूप) उग्र मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ
लंबे समय से चल रहे अदालती मामलों (Court cases) और राजनीति में विजय, असंभव प्रतीत होने वाली जीवन की समस्याओं का समाधान, शत्रुओं के तेज और शक्ति का पूर्ण नाश 17।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
लंबे समय से चल रहे अदालती मामलों (Court cases) और राजनीति में विजय, असंभव प्रतीत होने वाली जीवन की समस्याओं का समाधान, शत्रुओं के तेज और शक्ति का पूर्ण नाश 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
लंबे समय से चल रहे अदालती मामलों (Court cases) और राजनीति में विजय, असंभव प्रतीत होने वाली जीवन की समस्याओं का समाधान, शत्रुओं के तेज और शक्ति का पूर्ण नाश
जाप विधि
यह एक दिवसीय रात्रिकालीन साधना है। साधक स्नान कर पीले वस्त्र धारण करे और उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठे। लकड़ी के बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर बटुक भैरव यंत्र स्थापित करें। तेल का दीपक और धूप जलाएं। मुख्य जप से पूर्व बाएं हाथ में काले हकीक की माला लें और दाएं हाथ से अक्षत चढ़ाते हुए माला का मंत्रों द्वारा संस्कार करें। तदुपरांत काले हकीक की माला से मुख्य मंत्र की 11 माला जप करें। जो भोग अर्पित किया जाए, उसे साधक को उसी समय साधना स्थल पर ही ग्रहण करना अनिवार्य है 17।
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