ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

उग्र मंत्र

तीव्र प्रभावशाली मंत्र

42 मंत्र
उग्र तारा (त्वरित कार्य सिद्धि)

ॐ ह्रीं श्रीं उग्र तारे तुतारे देवदत्त फट्

जब परिस्थितियां अत्यंत विपरीत हों, शत्रु या तंत्र बाधा से भारी आर्थिक नुकसान हो रहा हो, उसका त्वरित समाधान और नकारात्मक ऊर्जा की शांति 20।

शरभेश्वर (महामाला मंत्र)

ॐ खं खं खं सर्व शत्रु संहारणाय स्वाहा

महा-ग्रह बंधन और प्रेत बंधन से मुक्ति, शत्रु का समूल नाश और सभी प्रकार के घोर तांत्रिक बंधनों की काट 15।

उग्र भैरव

ॐ नमो भगवते उग्र भैरवाय सर्वविघ्ननाशाय ठः ठः स्वाहा

सर्वविघ्ननाश, सांसारिक पाश से मुक्ति, घोर दुःख, रोग-विकार व प्रबल शत्रुओं का समूल नाश 12।

दक्षिण काली

ॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

घातक तंत्र बाधा, पारिवारिक विघटन, भारी ऑब्सटेकल (obstacles) व भीषण शत्रु बाधा का तत्काल निवारण 14।

श्मशान काली

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे श्मशान कालिकायै सर्व बाधा निवारणाय सर्व शत्रु संहारणाय मम रक्षां कुरु कुरु स्वाहा

घोर भूत-प्रेत बाधा नाश, अज्ञान-अंधकार और कुमति का निवारण, प्रबल शत्रु का उग्र संहार 13।

महाकाली (शत्रुनाशक उग्र रूप)

ॐ ऐं ह्रीं महाकालिकायै सर्व शत्रु नाशाय नाशाय

तुरंत फल प्राप्ति, शत्रु का अत्यंत तीव्र मारण व समस्त भयंकर संकटों का नाश 39।

कालिका (घोर रूपा)

ॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्

शत्रुओं की गति, वाणी व बुद्धि का पूर्ण स्तंभन (Paralysis of enemies) 40।

भद्रकाली

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं भद्रकाल्यै क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा

महाघोर संकट व शत्रु का नाश, और जीवन में अघोर भयमुक्ति 41।

चामुण्डा (नवार्ण आधार)

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

आत्मबल और आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि, जीवन की विपत्तियों का नाश और शक्ति का तीव्र संचार 43।

चामुण्डा (त्र्यक्षरी महा-उग्र मंत्र)

क्लीं क्लीं हूं

माता के चण्ड-मुण्ड विनाशिनी उग्र स्वरूप का जागरण, घर की सब समस्याओं और प्रबल शत्रुओं का शमन 44।

उग्र तारा (नील सरस्वती / एकाजटा)

ॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्

अघोर साधना में अत्यंत शीघ्र सफलता, महा-विपत्ति एवं सर्व विघ्नों का शमन 21।

शरभेश्वर (पक्षिराज गायत्री)

ॐ पक्षिराजाय विद्महे शरभेश्वराय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्

कृत्या दोष नाश, असाध्य रोग शांति, और एक ऐसे उग्र रक्षा कवच का निर्माण जिसे त्रिदेव भी भेद न सकें 15।

लाकिनी

ॐ लां लाकिन्यै नमः

मणिपुर चक्र का उग्र जागरण, महा-तांत्रिक उग्र शक्ति की प्राप्ति 45।

भीम भैरव

ॐ ह्रीं मैं भीमाय नमः

उग्र रक्षा, दैहिक और तांत्रिक सुरक्षा तथा विशेष तांत्रिक सिद्धियों की शीघ्र प्राप्ति 12।

कालरात्रि (दीपनी विद्या)

अं ङं ञं णं नं मं

कालविनाशिनी शक्ति का जागरण, और अन्य मंत्रों को 100 गुना अधिक वेगवान (Powerful) व मारक बनाना 9।

अक्षोभ्य भैरव (तारा के भैरव)

ॐ स्त्रीं आं अक्षोभ्य स्वाहा

तारा तंत्र की पूर्णता, उग्र ऊर्जा का नियंत्रण व ब्रह्मांडीय संतुलन स्थापित करना 21।

शर्व भैरव

ॐ ह्रीं श्रीं शर्वाय नमः

प्राणिक ऊर्जा का रक्षण और तांत्रिक बाधाओं का उग्रता से निवारण 12।

त्रिपुर भैरव

ह्रीं श्रीं हंसः ह्सौं स्वाहा

तांत्रिक षट्कर्म की पूर्णता तथा उग्र भैरव की सर्वोच्च कृपा और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति 12।

असितांग भैरव (तांत्रिक स्वरूप)

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः

नीर-क्षीर विवेक की प्राप्ति, सृजन क्षमता का विकास, अद्भुत कल्पनाशक्ति तथा किसी भी प्रकार के पुराने शाप (Curse) से मुक्ति 23।

असितांग भैरव (अघोर/तीक्ष्ण स्वरूप)

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं असितांग भैरवाय, सर्व शाप विमोचनाय, मम कार्यं कुरु कुरु स्वाहा

विशेष कार्य सिद्धि, पुराने से पुराने शाप से पूर्ण मुक्ति, और सीमित बुद्धि का दहन कर असीमित चेतना की प्राप्ति 23।

अघोर भैरव (शाबर उग्र क्रिया)

ॐ नमो महादेव को काला भैरव काली रात भैरव चले अमावसरा आगे भैरव पीछे भैरव बाएं भैरव बाएं भैरव ऊपर पर आकाश भैरव नीचे पाताल भैरव पांच कोष पूरब बांध पांच कोष पश्चिम बांध पांच कोष उत्तर पांच कोष दक्षिण बांध जल थल वन गिरी गुफा बांध सात लोक सात पाताल नौ खंड बांध घर बांध दरवाजा बांध डाकनी साकनी पिशाचनी बांध भूत प्रेत वैताल खबीस चुड़ैल बांध मरघट कोशान शमशान की राख हवेरी की विद्या घोर क्रिया बांध भैरव की जंजीर चले हर बुरी बला दुष्ट शक्ति को बांध मृत्यु का भय काल की छाया समय की रेखा मंत्र की शक्ति तंत्र को प्रहार हाथ का खप्पर शत्रु का अस्त्रघात बांध हर बुरी बला दुष्ट शत्रु से रक्षा कर लीला ऐसा मार्ग खोले ना खुले जो खोले भैरव करंड से शत्रु नरक को जाए भाई शिव शंकर की दुहाई मदाकारी की ओम भैरवाय नमः

दुष्ट शक्ति, डाकनी, पिशाचनी, भूत-प्रेत को पूर्णतः बांधना, मृत्यु भय निवारण, शत्रु का अस्त्रघात से रक्षण व शत्रु का नरक गमन 22।

महा-विपरीत प्रत्यंगिरा

ॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।

शत्रु द्वारा किए गए भयंकर तांत्रिक प्रहार को दोगुनी शक्ति से उसी पर वापस पलटना (Reversal), सपरिवार शत्रु का समूल संहार और बुद्धि भ्रमित करना 10।

राज मातंगी

ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:

राजसी शक्ति की प्राप्ति, उच्च वशीकरण तथा विशेष तांत्रिक सिद्धियों का एकत्रीकरण 5।

बटुक भैरव (सर्व कार्य सिद्ध स्वरूप)

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ

लंबे समय से चल रहे अदालती मामलों (Court cases) और राजनीति में विजय, असंभव प्रतीत होने वाली जीवन की समस्याओं का समाधान, शत्रुओं के तेज और शक्ति का पूर्ण नाश 17।

बटुक भैरव (आपत्ति उद्धारण स्वरूप)

ॐ ह्रीं बं बटुकाय मम आपत्ति उद्धारणाय। कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ फट स्वाहा

मारक ग्रह दोष (विशेषकर शनि की साढ़े साती या ढैय्या) निवारण, मृत्यु भय नाश, और जीवन में आई भयंकर आपत्ति और प्राणघातक संकटों से तत्काल उद्धार 18।

काल भैरव (तांडव स्वरूप)

ओउम कालभैरवरूपाय त्रिनेत्राय महात्मने। प्रेतासनस्थितायैव खडगडमरूधारिणे।। जटाजूटधारी कराल वदनाय च। नमो नमः सदानंद भक्तवत्सल शम्भवे।। ओउम भं भैरवाय भीषणाय नखदंष्ट्राय विकर्तनाय। ताण्डवेशाय रक्तनेत्राय रक्षकाय शत्रुनाशकाय स्वाहा

छिपे शत्रु, प्रबल तंत्र-मंत्र व नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश, शत्रु की चाल उसी पर उलट देना तथा जीवन में विजय का संचार 19।

काल भैरव (क्रूर शत्रुनाशक स्वरूप)

ॐ भम भैरवाय नमस्तुभ्यम कपाले कृपणाय चंड मुंड विनाशाय वीरभद्र स्वरूपण सर्वत्र प्रभ देव रक्षक सुरा त्रोक्य विजय संभो नमस्ते काल रूपण ओम छम काल भैरवाय क्रूर रूपाय विकिरण मूर्धने श्री नेत्राय खग धणे दुर्जया भय हराय सर्व शत्रु संारकाय स्वाहा

शत्रु की चाल को भस्म करना, क्रूर व छिपे हुए शत्रुओं का पूर्ण विनाश और प्राणिक रक्षा 25।

काल भैरव (दुर्जन विनाशक स्वरूप)

ॐ भम भैरवाय कम कम दुर्जन विनाशाय शत्रु नाशाय फट स्वाहा

घोर दुर्जनों का विनाश और प्रबल शत्रुओं का त्वरित शमन 26।

उग्र नृसिंह

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

मृत्यु और अकाल मृत्यु पर विजय, सर्वव्यापी उग्र ऊर्जा से रक्षा, मारण प्रयोग एवं भयंकर अस्त्रों से बचाव 27।

तांत्रिक नृसिंह

ॐ नृम नृम नृम नर सिंहाय नमः

केवल 7 दिन में तीव्र तांत्रिक प्रहार का नाश, भूत-पिशाच निवारण, और असाध्य रोगों का शमन 29।

महा प्रत्यंगिरा (अथर्वण भद्रकाली)

ह्रीं क्षं भक्ष ज्वाला जिह्वे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हूं फट्

जीवन की घोर बाधाओं का निवारण, काले जादू व अभिचार का पूर्ण निष्कासन, मारक ग्रहों का शमन, और गहरे संचित नकारात्मक कर्मों (Deep-rooted sticky karmas) का नाश 2।

विपरीत प्रत्यंगिरा

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं प्रत्यंगिरे सर्वदुष्टान प्राचं छिन्धि छिन्धि

उग्र रक्षात्मक कवच का निर्माण, दुष्टों व शत्रुओं के प्राण व बुद्धि का तीव्र विच्छेदन 3।

सिद्ध मातंगी

ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्यै फट् स्वाहा

वाक् सिद्धि, कला और संगीत में अद्वितीय निपुणता की प्राप्ति तथा अत्यंत उग्र तांत्रिक ऊर्जा का जागरण 5।

विपरीत प्रत्यंगिरा (शत्रुनाशक गुरु मंत्र)

ॐ हूं स्फारय-स्फारय, मारय-मारय, शत्रु-वर्गान् नाशय-नाशय स्वाहा

सर्व-शत्रु-क्षय (ज्ञात और अज्ञात सभी प्रकार के शत्रुओं का तीव्र और निश्चित नाश) 10।

विपरीत प्रत्यंगिरा (अरिष्ट निवारक)

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरे मां रक्ष रक्ष मम शत्रून् भंजय-भंजय हुं फट् स्वाहा

आर्थिक, मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाले शत्रु का दमन, राजकीय व प्रशासनिक बाधा निवारण, तथा खोया हुआ पद व गरिमा पुनः प्राप्त करना 4।

सुमुखी मातंगी

उच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः

उग्र प्रभाव की उत्पत्ति, तीव्र वशीकरण तथा महा-पिशाचिनी शक्तियों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना 5।

बगलामुखी (ब्रह्मास्त्र विद्या)

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा

शत्रु की वाणी, मुख और पैरों का प्रबल स्तंभन (Paralysis), शत्रु की कुबुद्धि व षड्यंत्र का पूर्ण विनाश 6।

धूमावती

॥ धूं धूं धूमावती ठ: ठ: ॥

महा-शत्रु का मारण और स्तंभन, जीवन से दरिद्रता का नाश, गुप्त तांत्रिक जानकारी प्राप्त करना और बुद्धि का प्रखर विकास 6।

धूमावती (रोग व ज्वर नाशक उग्र रूप)

ॐ धूं धूं धूं धूमावती माम रक्ष रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा

प्राणघातक विषम ज्वर, भूत-प्रेत दोष, ताप ज्वर व शरीर पर किए गए समस्त कृत्रिम तांत्रिक दोषों का तत्काल निवारण 16।

छिन्नमस्ता (वायु गमन सिद्धि)

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा

वायु गमन (हवा में उड़ने की सिद्धि), अदृश्य सिद्धि, घोर वशीकरण और शत्रुओं का सर्वनाश 7।

छिन्नमस्ता (शून्य सिद्धि प्रयोग)

ॐ अक्षय श्री छिन्नमस्ता देवी जगत निवासनी अदृश्य सिद्धि शून्य गमन विजयै मम सिद्धि देहि देहि प्राण देहि देहि मम अमुक गौत्र अमुक शर्मा ह गुरूत्वाकर्षण शक्ति नाशय शून्य सिद्धि प्राप्तर्थं शक्ति स्याद विनियोग

भौतिक गुरुत्वाकर्षण शक्ति के प्रभाव का नाश, शून्य गमन सिद्धि व उच्च तांत्रिक ऊर्जा की निर्बाध प्राप्ति 7।

शरभेश्वर (शरभ शालुव)

ॐ खें खां खं फट् प्राण-ग्रहासि प्राण-ग्रहासि हुं फट् सर्वशत्रुसंहारणाय शरभशालुवाय पक्षिराजाय हुं फट् स्वाहा

असाध्य और अजेय शत्रुओं का समूल संहार, अति भयंकर तंत्र बाधाओं व कृत्या प्रयोग की अचूक काट 12।