ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
असितांग भैरव (अघोर/तीक्ष्ण स्वरूप)

असितांग भैरव (अघोर/तीक्ष्ण स्वरूप) उग्र मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं असितांग भैरवाय, सर्व शाप विमोचनाय, मम कार्यं कुरु कुरु स्वाहा

विशेष कार्य सिद्धि, पुराने से पुराने शाप से पूर्ण मुक्ति, और सीमित बुद्धि का दहन कर असीमित चेतना की प्राप्ति 23।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारउग्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

विशेष कार्य सिद्धि, पुराने से पुराने शाप से पूर्ण मुक्ति, और सीमित बुद्धि का दहन कर असीमित चेतना की प्राप्ति 23।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

विशेष कार्य सिद्धि, पुराने से पुराने शाप से पूर्ण मुक्ति, और सीमित बुद्धि का दहन कर असीमित चेतना की प्राप्ति

जाप विधि

अघोर पंथ की इस तीक्ष्ण साधना को श्मशान के पास बहती नदी के किनारे पंचमकार या राजसिक द्रव्यों के प्रतिनिधि द्रव्यों के साथ गुरु आज्ञा से संपन्न किया जाता है 23।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

tantrik mantra

ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा

siddh mantra

ॐ नमः वज्र का कोठा । जिसमे पिण्ड हमारो पेठा । ईश्वर कुंजी । ब्रह्मा का ताला । मेरे आठो धाम का यति हनुमंत रखवाला ॥

mool mantra

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय

stotra mantra

देवासुर मनुष्याश्च सिद्ध विद्या धरोरगाः त्वया विलोकिताः सर्वे नाश यान्ति समूलतः। प्रसाद कुरु मे सौरे वरदो भव भास्करे एवं स्तुतस्तदा ग्रह राजो महाबलः। 47

gyan mantra

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

jap mantra

ॐ दाम् दत्तात्रेयाय स्वाहा