माता बगलामुखी (श्री बगलामुखी कवच) कवच मंत्र
ॐ सौवर्णासन-संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्लासिनीम्। हेमाभांगरुचिं शशांक-मुकुटां सच्चम्पक स्रग्युताम्।। हस्तैर्मुद्गर पाश वज्ररसनाः संबिभ्रतीं भूषणैः। व्याप्तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्तम्भिनीं चिन्तयेत्।। शिरो मे पातु ॐ ह्रीं ऐं श्रीं क्लीं पातु ललाटकम्। सम्बोधन-पदं पातु नेत्रे श्रीबगलानने।। श्रुतौ मम रिपुं पातु नासिकां नाशयद्वयम्। पातु गण्डौ सदा मामैश्वर्याण्यन्तं तु मस्तकम्।। देहि द्वन्द्वं सदा जिह्वां पातु शीघ्रं वचो मम। कण्ठदेशं मनः पातु वाञ्छितं बाहुमूलकम्।। कार्यं साधयद्वन्द्वं तु करौ पातु सदा मम। मायायुक्ता तथा स्वाहा हृदयं पातु सर्वदा।। अष्टाधिक चत्वारिंश दण्डाढया बगलामुखी। रक्षां करोतु सर्वत्र गृहेऽरण्ये सदा मम।। ब्रह्मास्त्राख्यो मनुः पातु सर्वांगे सर्व सन्धिषु। मन्त्रराजः सदा रक्षां करोतु मम सर्वदा।। ॐ ह्रीं पातु नाभिदेशं कटिं मे बगलाऽवतु। मुखिवर्णद्वयं पातु लिंग मे मुष्क-युग्मकम्।। जानुनी सर्वदुष्टानां पातु मे वर्णपञ्चकम्। वाचं मुखं तथा पादं षड्वर्णाः परमेश्वरी।। जंघायुग्मे सदा पातु बगला रिपुमोहिनी। स्तम्भयेति पदं पृष्ठं पातु वर्णत्रयं मम।। जिह्वा वर्णद्वयं पातु गुल्फौ मे कीलयेति च। पादोर्ध्व सर्वदा पातु बुद्धिं पादतले मम।। विनाशय पदं पातु पादांगुल्योर्नखानि मे। ह्रीं बीजं सर्वदा पातु बुद्धिन्द्रियवचांसि मे।। सर्वांगं प्रणवः पातु स्वाहा रोमाणि मेऽवतु। ब्राह्मी पूर्वदले पातु चाग्नेय्यां विष्णुवल्लभा।। माहेशी दक्षिणे पातु चामुण्डा राक्षसेऽवतु। कौमारी पश्चिमे पातु वायव्ये चापराजिता।। वाराही चोत्तरे पातु नारसिंही शिवेऽवतु। ऊर्ध्वं पातु महालक्ष्मीः पाताले शारदाऽवतु।। इत्यष्टौ शक्तयः पान्तु सायुधाश्च सवाहनाः। राजद्वारे महादुर्गे पातु मां गणनायकः।। श्मशाने जलमध्ये च भैरवश्च सदाऽवतु। द्विभुजा रक्तवसनाः सर्वाभरणभूषिताः।। योगिन्यः सर्वदा पान्तु महारण्ये सदा मम। इति ते कथितं देवि कवचं परमाद् भुतम्।। 13
भयंकर शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन एवं नाश, अकाल मृत्यु से सुरक्षा, ब्रह्मास्त्र आदि अस्त्र-शस्त्रों से अभेद्य रक्षा, वशीकरण, अपुत्र को पुत्र व निर्धन को अपार धन की प्राप्ति तथा असाध्य कार्यों की सिद्धि 13
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
भयंकर शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन एवं नाश, अकाल मृत्यु से सुरक्षा, ब्रह्मास्त्र आदि अस्त्र-शस्त्रों से अभेद्य रक्षा, वशीकरण, अपुत्र को पुत्र व निर्धन को अपार धन की प्राप्ति तथा असाध्य कार्यों की सिद्धि 13।
इस मंत्र से क्या होगा?
भयंकर शत्रुओं का पूर्ण स्तंभन एवं नाश, अकाल मृत्यु से सुरक्षा, ब्रह्मास्त्र आदि अस्त्र-शस्त्रों से अभेद्य रक्षा, वशीकरण, अपुत्र को पुत्र व निर्धन को अपार धन की प्राप्ति तथा असाध्य कार्यों की सिद्धि
जाप विधि
सर्वप्रथम गुरुदेव से आज्ञा प्राप्त करें। बगलामुखी यंत्र के सम्मुख रात्रि काल में ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए जप करें। पुरश्चरण हेतु 111 पाठ करें और विशिष्ट अनुष्ठान हेतु 11 दिन में 1100 पाठ का संकल्प लें। इसे भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखकर पुरुष दाहिने हाथ में और स्त्री बाएं हाथ में धारण करें 13।
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navgrah mantraॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
beej mantraग्रौं
kaamya mantraया श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
vaidik mantraॐ एह् ऊ षु ब्रवाणि तेऽग्न इत्थेतरा गिरः । एभिर्वर्धास इन्दुभिः ॥