भगवती चण्डिका काम्य मंत्र
नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
समस्त पूर्वकृत पापों का नाश और भगवती की अनन्य भक्ति की प्राप्ति 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त पूर्वकृत पापों का नाश और भगवती की अनन्य भक्ति की प्राप्ति 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त पूर्वकृत पापों का नाश और भगवती की अनन्य भक्ति की प्राप्ति
जाप विधि
भक्तिपूर्वक देवी के समक्ष नित्य जप 28।
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कौशलेंद्र
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