देवी दुर्गा काम्य मंत्र
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥
किसी कार्य विशेष में सफलता (सिद्धि) मिलेगी या असफलता, इसका स्वप्न के माध्यम से पूर्व-आभास प्राप्त करना 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
किसी कार्य विशेष में सफलता (सिद्धि) मिलेगी या असफलता, इसका स्वप्न के माध्यम से पूर्व-आभास प्राप्त करना 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
किसी कार्य विशेष में सफलता (सिद्धि) मिलेगी या असफलता, इसका स्वप्न के माध्यम से पूर्व-आभास प्राप्त करना
जाप विधि
किसी विशेष कार्य के परिणाम को जानने हेतु रात्रि में सोने से पूर्व देवी का स्मरण करते हुए इस मंत्र का १०८ बार जप कर सो जाएं 28।
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ॐ गं गरिमायै नमः स्वाहा ।
ugra mantraॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
vaidik mantraॐ सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान्नेनीयतेऽभीशुभिर्वाजिन इव । हृत्प्रतिष्ठं यदजिरं जविष्ठं तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
stotra mantraनारायणाखिलगुरो भगवन्नमस्ते ॥ 4
navgrah mantraॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
bhakti mantraरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये