अष्टसिद्धि योग (गरिमा सिद्धि) सिद्ध मंत्र
ॐ गं गरिमायै नमः स्वाहा ।
स्वयं को अनंत रूप से भारी बना लेने की क्षमता, जिसे कोई हिला न सके 50। आध्यात्मिक रूप से यह साधक को उसके सिद्धांतों और मूल्यों में 'अचल' और दृढ़ बना देता है 50।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
स्वयं को अनंत रूप से भारी बना लेने की क्षमता, जिसे कोई हिला न सके 50। आध्यात्मिक रूप से यह साधक को उसके सिद्धांतों और मूल्यों में 'अचल' और दृढ़ बना देता है 50।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्वयं को अनंत रूप से भारी बना लेने की क्षमता, जिसे कोई हिला न सके 50
आध्यात्मिक रूप से यह साधक को उसके सिद्धांतों और मूल्यों में 'अचल' और दृढ़ बना देता है
जाप विधि
शरीर के गुरुत्व केंद्र (Center of Gravity) पर ध्यान केंद्रित करते हुए इस मंत्र का जप किया जाता है 53।
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जूं
stotra mantraगदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि। कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।। 7
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
mool mantraॐ ऐं ऐं मनो वाञ्छित सिद्धये ऐं ऐं ॐ
naam mantraबृहस्पति
kaamya mantraदेवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥