दत्तात्रेय उपासना (अघोर स्वरूप) सिद्ध मंत्र
ॐ ह्रीं द्रां दत्तात्रेय हरेकृष्ण उन्मत्तानन्द दायक दिगम्बर । मुने बाल पिशाच ज्ञान सागर द्रां ह्रीं ॐ ॥
कर्म बंधनों की निवृत्ति, अवचेतन की रुकावटों का निवारण, और ज्ञान के महासागर (Gnana Sagara) तक पहुँच 84। यह साधक को आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) और परम वैराग्य प्रदान करता है 83।
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यह मंत्र क्यों?
कर्म बंधनों की निवृत्ति, अवचेतन की रुकावटों का निवारण, और ज्ञान के महासागर (Gnana Sagara) तक पहुँच 84। यह साधक को आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) और परम वैराग्य प्रदान करता है 83।
इस मंत्र से क्या होगा?
कर्म बंधनों की निवृत्ति, अवचेतन की रुकावटों का निवारण, और ज्ञान के महासागर (Gnana Sagara) तक पहुँच 84
यह साधक को आत्म-साक्षात्कार (Self-realization) और परम वैराग्य प्रदान करता है
जाप विधि
भगवान दत्तात्रेय की प्रतिमा का पंचोपचार पूजन करते हुए, इस मंत्र से पाद्य, अर्घ्य, स्नान और नीराजन (आरती) अर्पित की जाती है 84।
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