वाहन मंत्र (गणपति) सिद्ध मंत्र
ॐ मं मूषिकायै गणाधिपवाहनाय धर्मराजाय स्वाहा ।
यह साधना मुख्य रूप से यम (धर्मराज) और पूर्व जन्मों के घोर कर्म फलों को शांत करने के लिए है 53। यह पापों का शमन कर साधक के जीवन के भारी बोझ और दुखों को दूर करती है 53।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
यह साधना मुख्य रूप से यम (धर्मराज) और पूर्व जन्मों के घोर कर्म फलों को शांत करने के लिए है 53। यह पापों का शमन कर साधक के जीवन के भारी बोझ और दुखों को दूर करती है 53।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह साधना मुख्य रूप से यम (धर्मराज) और पूर्व जन्मों के घोर कर्म फलों को शांत करने के लिए है 53
यह पापों का शमन कर साधक के जीवन के भारी बोझ और दुखों को दूर करती है
जाप विधि
साधक गणेश जी की मूर्ति को हाथों में लेकर शिवलिंग या मंदिर की कम से कम तीन बार परिक्रमा करता है और परिक्रमा के दौरान इस मंत्र का निरंतर उच्चारण करता है 53।
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ॐ रामाय नमः
stotra mantraकुंचितै: कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयो:। हारकेयूरकं कंकणप्रोज्ज्वलं किंकिणीमंजुलं श्यामलं तं भजे।। 9
beej mantraत्व्म्श्रीः
mool mantraॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
kaamya mantraश्रीं क्लीं श्रीं॥
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥