केतु नवग्रह मंत्र
ॐ जैमिनिगोत्राय विद्महे धूम्रवर्णाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु
जाप विधि
ग्रहण काल या विशेष मारक दशा में एक सौ आठ बार जप। 16
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