केतु नवग्रह मंत्र
ॐ जैमिनिगोत्राय विद्महे धूम्रवर्णाय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
पूर्वजों के दिए गए शाप या पितृ दोष के सूक्ष्म प्रभावों का शमन और वंश वृद्धि में आ रही बाधाओं को दूर करने हेतु
जाप विधि
ग्रहण काल या विशेष मारक दशा में एक सौ आठ बार जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा
kaamya mantraदुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥
mool mantraॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्
bhakti mantraॐ नमो नारायणाय
vaidik mantraॐ अग्न आ याहि वीतये गृणानो हव्यदातये । नि होता सत्सि बर्हिषि ॥
gyan mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥