नवग्रह (सामूहिक) नवग्रह मंत्र
ॐ आदित्याय सोमाय मङ्गलाय बुधाय च। गुरु शुक्र शनिभ्यश्च राहवे केतवे नमः॥
सभी नौ ग्रहों को एक साथ अनुकूल बनाने, दैनिक गोचर (Transit) के कारण उत्पन्न होने वाली सामान्य बाधाओं को टालने और नवग्रहों की कृपा से दिन-प्रतिदिन के भौतिक तथा आध्यात्मिक कार्यों में निर्विघ्न सफलता प्र
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सभी नौ ग्रहों को एक साथ अनुकूल बनाने, दैनिक गोचर (Transit) के कारण उत्पन्न होने वाली सामान्य बाधाओं को टालने और नवग्रहों की कृपा से दिन-प्रतिदिन के भौतिक तथा आध्यात्मिक कार्यों में निर्विघ्न सफलता प्राप्त करने हेतु यह अत्यंत प्रभावी है। 6
इस मंत्र से क्या होगा?
सभी नौ ग्रहों को एक साथ अनुकूल बनाने, दैनिक गोचर (Transit) के कारण उत्पन्न होने वाली सामान्य बाधाओं को टालने और नवग्रहों की कृपा से दिन-प्रतिदिन के भौतिक तथा आध्यात्मिक कार्यों में निर्विघ्न सफलता प्राप्त करने हेतु यह अत्यंत प्रभावी है
जाप विधि
नवग्रह वेदी पर ग्रहों का ध्यान करते हुए अथवा नवग्रहों की समिधा को अग्नि में अर्पित करते समय इस ध्यान मंत्र का जप किया जाता है। नित्य पूजा पद्धति में इसे पूर्व दिशा की ओर मुख करके बिना किसी विशिष्ट माला के भी २१ या १०८ बार जपा जा सकता है। इसे नवग्रह स्तोत्र के आदि मंत्र के रूप में भी जपा जाता है। 4
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