गुरु नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है
जाप विधि
गुरुवार के दिन स्वर्ण या पीतल के गुरु यंत्र के समक्ष पीले पुष्प व चने की दाल अर्पित कर हल्दी की माला से जप। 8
विशेष टिप्पणियाँ
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