ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
गुरु

गुरु नवग्रह मंत्र

ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥

तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है

जाप विधि

गुरुवार के दिन स्वर्ण या पीतल के गुरु यंत्र के समक्ष पीले पुष्प व चने की दाल अर्पित कर हल्दी की माला से जप। 8

विशेष टिप्पणियाँ

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भैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2

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