गुरु नवग्रह मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रीं ठः ऐं ठः श्रीं ठः स्वाहा॥
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र और मंत्र साधनाओं की पूर्ण सिद्धि में गुरु का अभेद्य रक्षण प्राप्त करने, और ब्रह्मांडीय ऐश्वर्य व गुप्त ज्ञान की असीम प्राप्ति हेतु यह आगम मंत्र प्रयुक्त होता है
जाप विधि
गुरुवार के दिन स्वर्ण या पीतल के गुरु यंत्र के समक्ष पीले पुष्प व चने की दाल अर्पित कर हल्दी की माला से जप। 8
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ऐं ऐं महाभैरवि एहि एहि ईशानदिशायां बन्धय बन्धय ईशानमुखं स्तम्भय स्तम्भय ईशानशस्त्रं निवारय निवारय सर्वसैन्यं कीलय कीलय पच पच मथ मथ मर्दय मर्दय ॐ ह्लीं वश्यं कुरु करु ॐ ह्लां बगलामुखि हुं फट् स्वाहा
siddh mantraॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
mool mantraॐ मत्स्याय नमः
stotra mantraसृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 24
gyan mantraॐ अक्षरेस्वराय विद्महे मन्त्रराजाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात् ॥
jap mantraॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा