शनि देव जप मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
साढ़ेसाती व ढैय्या के मारक कष्टों से रक्षा, जीवन में धैर्य, स्थिरता और न्याय की प्राप्ति। 27
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
साढ़ेसाती व ढैय्या के मारक कष्टों से रक्षा, जीवन में धैर्य, स्थिरता और न्याय की प्राप्ति। 27
इस मंत्र से क्या होगा?
साढ़ेसाती व ढैय्या के मारक कष्टों से रक्षा, जीवन में धैर्य, स्थिरता और न्याय की प्राप्ति
जाप विधि
२३००० जप संख्या (४० दिन में), रुद्राक्ष माला, सूर्यास्त के पश्चात या रात्रिकाल में। 24
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
siddh mantraॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा ।
beej mantraश्रौं
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं क्लीं प्रत्यंगिरे सर्वदुष्टान प्राचं छिन्धि छिन्धि
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥