ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

जप मंत्र

नित्य जाप के लिए उपयुक्त

52 मंत्र
भगवान नरसिंह (शाबर)

ॐ उलटत नरसिंह पलटत काया एहिले नरसिंह तोहे बुलाया जो मोर नाम करत सो मरत परत भैरव चक्कर में उल्टी वेद उसी को लागे कार दुहाई बड़े वीर नरसिंह की दुहाई कामरो कामाख्या देवी की दुहाई अष्टभुज देवी कालिका की दुहाई शिव सतगुरु के बंदे पायो

मारण-मोहन, व्यापारिक बंधन, शारीरिक बाधाओं और हठी तंत्र-मंत्र का समूल नाश (उलटवार)। 75

शनि देव

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः

साढ़ेसाती व ढैय्या के मारक कष्टों से रक्षा, जीवन में धैर्य, स्थिरता और न्याय की प्राप्ति। 27

राहु देव

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

अज्ञात भय एवं दुस्वप्न का नाश, अचानक आने वाली बाधाओं से सुरक्षा और कालसर्प दोष की शांति। 60

श्री हनुमान

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्

आत्मविश्वास एवं अदम्य साहस में वृद्धि, शारीरिक बल प्राप्ति और हर प्रकार के भय का शमन। 65

केतु देव

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

वैराग्य एवं मोक्ष की प्राप्ति, गूढ़ व रहस्यमयी विद्याओं का ज्ञान और असाध्य चर्म रोगों से मुक्ति। 27

श्री हनुमान (रुद्र अवतार)

ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा

असाध्य रोगों का निवारण, शत्रुओं का पूर्ण संहार और नकारात्मक शक्तियों से अभेद्य रक्षा। 65

श्री हनुमान

श्री राम दूताय नम:

भूत-प्रेत तथा बुरी आत्माओं के प्रभाव से मुक्ति और मानसिक निवारण। 64

श्री हनुमान (शाबर)

अंजनीगर्भित संभूत कपूर रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमं रक्ष सर्वदा

यात्रा में पूर्ण सुरक्षा, संकटों से निवारण और पवनपुत्र हनुमान की प्रत्यक्ष रक्षण कृपा। 66

भगवान शिव (पंचाक्षरी)

ॐ नमः शिवाय

मोक्ष प्राप्ति, आत्मज्ञान, मानसिक शांति, नकारात्मक विचारों का नाश एवं सर्व भयों से मुक्ति। 2

काल भैरव

ॐ कालभैरवाय नमः

समय के दुष्प्रभावों पर नियंत्रण, अनिश्चितता एवं भय से पूर्ण मुक्ति, तथा बुरी शक्तियों से रक्षण। 68

काल भैरव (कवच)

ॐ ह्रं ह्रीं ह्रूं कालभैरवाय फट्

शरीर के चारों ओर अभेद्य सुरक्षा कवच का निर्माण और नकारात्मक शक्तियों का आक्रामक शमन। 68

बटुक भैरव

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा

आकस्मिक व जीवनघाती विपत्तियों (आपदाओं) से तत्काल रक्षा, शत्रु शमन और निर्भीकता की प्राप्ति। 69

भगवान नरसिंह

ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

घोर शत्रु बाधा निवारण, अकाल मृत्यु भय नाश, और भूत-प्रेत तथा तांत्रिक आघातों से त्वरित रक्षा। 73

बुध देव

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः

बौद्धिक तीक्ष्णता का विकास, व्यापार व वाणिज्य में सफलता और वाणी दोष का निवारण। 24

भगवान नरसिंह (स्तम्भन)

ॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा

डाकिनी, पिशाच, भूत-प्रेत बाधा निवारण एवं कुसंगति में फंसे व्यक्ति का वशीकरण/सुधार। 76

भगवान दत्तात्रेय

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः

योग्य आध्यात्मिक गुरु की प्राप्ति, पितृदोष और ऋण दोष से मुक्ति, तथा त्रिदेवों की सम्मिलित कृपा। 77

कार्तवीर्यार्जुन

ॐ कार्तवीर्याय विद्महे महावीर्याय धीमहि तन्नोऽर्जुनः प्रचोदयात्

खोई हुई वस्तुओं की प्राप्ति, राजभय का नाश और अपार पराक्रम की सिद्धि। 79

भगवान दत्तात्रेय (बीज)

ॐ दाम् दत्तात्रेयाय स्वाहा

दत्तात्रेय भगवान की त्वरित कृपा और भौतिक-आध्यात्मिक सुरक्षा। 78

चण्डी (उत्कीलन-१)

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशानुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा

दुर्गा सप्तशती एवं नवार्ण मंत्र के शाप का शमन और अनुग्रह की प्राप्ति। 29

भगवान शिव (महामृत्युंजय)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

अकाल मृत्यु से रक्षा, असाध्य रोगों से मुक्ति, दीर्घायु, अनिष्ट ग्रहों की शांति और जन्म-मरण के चक्र से मोक्ष। 2

चण्डी (उत्कीलन-२)

ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा

सप्तशती मंत्रों का उत्कीलन (बंधन खोलना) जिससे वे तत्काल जाग्रत हो जाएँ। 29

चण्डी (सजीवन)

ॐ ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि विधे मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा

सुप्त या मृतप्राय मंत्रों में प्राण-प्रतिष्ठा (सजीवन) कर उन्हें फलदायी बनाना। 29

भगवान विष्णु (अष्टाक्षरी)

ॐ नमो नारायणाय

भौतिक एवं सांसारिक बंधनों से मुक्ति, वैकुण्ठ पद की प्राप्ति और दरिद्रता तथा मृत्यु भय का नाश। 2

भगवान शिव (रुद्र गायत्री)

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्

आत्मिक बल की वृद्धि, चेतना का सर्वोच्च विकास और शिव सायुज्य की प्राप्ति। 2

भगवान विष्णु (द्वादशाक्षरी)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

मोक्ष प्राप्ति, महापापों का नाश, करुणा का जागरण और परम पद की प्राप्ति। 2

भगवान विष्णु (महामंत्र)

ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः

हृदय से नकारात्मक भावनाओं का निष्कासन, पूर्व कर्मों का प्रायश्चित, ऐश्वर्य, ज्ञान और सर्वतोभद्र सुरक्षा। 2

माता सरस्वती

ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः

अज्ञान का नाश और विद्या की देवी की प्रत्यक्ष कृपा। 50

सविता देव (गायत्री)

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

बुद्धिमत्ता (मेधा) का विकास, चेतना का दिव्यकरण, ज्ञान प्राप्ति और अज्ञान रूपी अंधकार का नाश। 2

श्री राम

श्री राम जय राम जय जय राम

सर्व बाधाओं एवं विपत्तियों का त्वरित निवारण, पूर्ण शरणागति, और अमोघ शांति की प्राप्ति। 40

भगवान सुदर्शन

ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्ममन्त्रयन्त्रौषधास्त्रशस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय दीप्त्रे ज्वालापरीताय सर्वदिक्षोभणकराय हुँ फट् ब्रह्मणे परंज्योतिषे स्वाहा

समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, ज्ञात-अज्ञात शत्रुओं और मारण-मोहन तंत्र का समूल नाश। 42

भगवान हयग्रीव

ॐ हसां हसीं हसूं हसैं हसौं हसः

सर्वोच्च दिव्य ज्ञान की प्राप्ति, विद्या में सफलता, और मानसिक भ्रम या अज्ञान का शमन। 44

नवदुर्गा / चण्डी (नवार्ण)

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

अपार शक्ति की प्राप्ति, सर्व प्रकार के संकटों का नाश, और भौतिक इच्छाओं के साथ मोक्ष की सिद्धि। 45

माता दुर्गा

ॐ श्री दुर्गायै नमः

आंतरिक भय का नाश, प्रचंड शक्ति की प्राप्ति और जीवन के सभी भौतिक कष्टों से मुक्ति। 46

भगवती महालक्ष्मी

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

स्थिर धन-संपत्ति, स्थायी ऐश्वर्य, ऋण मुक्ति, दरिद्रता नाश और व्यापार में निरंतर व निर्बाध उन्नति। 21

भगवती महालक्ष्मी

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

धन आगमन और आर्थिक स्थिरता। 46

भगवती महालक्ष्मी (गायत्री)

ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्॥

घर में सुख-समृद्धि का वास, अलक्ष्मी का नाश और देवी का स्थायी आशीर्वाद। 48

माता सरस्वती

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां सर्वविद्यां देहि दापय स्वाहा

स्मरण शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि, कुशाग्र बुद्धि, कला और वाक्-सिद्धि की प्राप्ति। 49

माता सरस्वती (बीज)

ॐ ऐं क्लीं सौः

ज्ञान, शिक्षा और संगीत में सर्वोच्च सफलता। 51

शांति एवं सद्भाव

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥

गुरु-शिष्य के मध्य सामंजस्य, द्वेष का समूल नाश, विश्व शांति और मानवता का कल्याण। 2

परब्रह्म (प्रणव)

ब्रह्मांडीय लय से तादात्म्य, हृदय गति का शमन, मन की पूर्ण शांति और मोक्ष। 2

माता सरस्वती

ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः

मानसिक एकाग्रता और प्रज्ञा का जागरण। 46

माता बगलामुखी (महाविद्या)

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा

प्रबल शत्रुओं का स्तम्भन, वाक् सिद्धि, मुकदमों (कोर्ट-कचहरी) में विजय, और तांत्रिक मारण प्रयोगों से रक्षा। 52

श्री गणेश

ॐ गण गणपतये नमः

सर्व विघ्न निवारण, कार्यों में निर्बाध सफलता, आत्म-विश्वास में वृद्धि तथा मानसिक एकाग्रता प्राप्ति। 17

श्री गणेश

ॐ सिद्धि वराय नमः

मनोवांछित कार्यों की पूर्ण सिद्धि और वरदान की प्राप्ति। 17

श्री गणेश

ॐ श्रीं गं गणपतये नमः

समृद्धि और विघ्नों के एक साथ शमन हेतु। 57

भगवान कार्तिकेय (स्कन्द)

ॐ कार्तिकेयाय विद्महे वल्लीनाथाय धीमहि तन्नो स्कन्दः प्रचोदयात्

मनोकामनाओं की त्वरित पूर्ति, ब्रह्मचर्य की रक्षा, नेतृत्व क्षमता में वृद्धि और विजय की प्राप्ति। 58

सूर्य देव

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

असाध्य शारीरिक व्याधियों से मुक्ति, समाज में यश, तेज, नेत्र-ज्योति और सम्मान की प्राप्ति। 60

चन्द्र देव

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः

मानसिक अवसाद (Depression) का नाश, एकाग्रता, शीतलता और मन की पूर्ण शांति। 24

मंगल देव

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

अकारण क्रोध व रक्त संबंधी दोषों का नाश, ऋण मुक्ति और साहस में अपार वृद्धि। 60

परब्रह्म (अजपा)

सोऽहम्

नाड़ी शोधन, कुंडलिनी जागरण, श्वास का नियमन और "मैं ही वह परब्रह्म हूँ" के आत्म-बोध की प्राप्ति। 13

शुक्र देव

ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः

श्रेष्ठ भौतिक सुखों की प्राप्ति, दांपत्य जीवन में माधुर्य, कला के क्षेत्र में सफलता और ऐश्वर्य। 27

बृहस्पति देव (गुरु)

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः

पितृदोष की शांति, उच्च शिक्षा व पांडित्य की प्राप्ति, और आध्यात्मिक साधना में उन्नति। 23