श्री गणेश जप मंत्र
ॐ गण गणपतये नमः
सर्व विघ्न निवारण, कार्यों में निर्बाध सफलता, आत्म-विश्वास में वृद्धि तथा मानसिक एकाग्रता प्राप्ति। 17
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्व विघ्न निवारण, कार्यों में निर्बाध सफलता, आत्म-विश्वास में वृद्धि तथा मानसिक एकाग्रता प्राप्ति। 17
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्व विघ्न निवारण, कार्यों में निर्बाध सफलता, आत्म-विश्वास में वृद्धि तथा मानसिक एकाग्रता प्राप्ति
जाप विधि
१०८ बार (१ माला), रुद्राक्ष या स्फटिक माला, प्रातः काल पूर्व दिशा की ओर मुख करके। 2
विशेष टिप्पणियाँ
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मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥
siddh mantraॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
ugra mantraह्रीं क्षं भक्ष ज्वाला जिह्वे कराल दंष्ट्रे प्रत्यंगिरे क्षं ह्रीं हूं फट्
shanti mantraॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं न इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम् । अवतु वक्तारम् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraपशुपतिनाथ
navgrah mantraॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।