शनि नवग्रह मंत्र
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
गुप्त शत्रुओं का विनाश, लंबी बीमारियों से धीरे-धीरे मुक्ति और न्यायपालिका के मामलों में निर्णय पक्ष में करने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुप्त शत्रुओं का विनाश, लंबी बीमारियों से धीरे-धीरे मुक्ति और न्यायपालिका के मामलों में निर्णय पक्ष में करने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
गुप्त शत्रुओं का विनाश, लंबी बीमारियों से धीरे-धीरे मुक्ति और न्यायपालिका के मामलों में निर्णय पक्ष में करने हेतु
जाप विधि
शनिवार रात्रि पश्चिम मुख होकर रुद्राक्ष माला से एक सौ आठ बार जप। 16
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sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
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