केतु नवग्रह मंत्र
ॐ कें केतवे नमः
केतु की दैनिक शांति, अकारण भटकाव (Aimlessness) से बचाव और जीवन के प्रति विरक्ति को दूर कर कर्म मार्ग पर लगाने हेतु। 1
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
केतु की दैनिक शांति, अकारण भटकाव (Aimlessness) से बचाव और जीवन के प्रति विरक्ति को दूर कर कर्म मार्ग पर लगाने हेतु। 1
इस मंत्र से क्या होगा?
केतु की दैनिक शांति, अकारण भटकाव (Aimlessness) से बचाव और जीवन के प्रति विरक्ति को दूर कर कर्म मार्ग पर लगाने हेतु
जाप विधि
नित्य रात्रि के समय एक सौ आठ बार जप। 1
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ नमो विपरीत-प्रत्यंगिरायै सहस्त्रानेक-कार्य-लोचनायै कोटि-विद्युज्जिह्वायै महा-व्याव्यापिन्यै संहार-रुपायै जन्म-शान्ति-कारिण्यै। मम स-परिवारकस्य भावि-भूत-भवच्छत्रून् स-दाराऽपत्यान् संहारय संहारय, महा-प्रभावं दर्शय दर्शय, हिलि हिलि, किलि किलि, मिलि मिलि, चिलि चिलि, भूरि भूरि, विद्युज्जिह्वे, ज्वल ज्वल, प्रज्वल प्रज्वल, ध्वंसय ध्वंसय, प्रध्वंसय प्रध्वंसय, ग्रासय ग्रासय, पिब पिब, नाशय नाशय, त्रासय त्रासय, वित्रासय वित्रासय, मारय मारय, विमारय विमारय, भ्रामय भ्रामय, विभ्रामय विभ्रामय, द्रावय द्रावय, विद्रावय विद्रावय हूं हूं फट् स्वाहा।।
siddh mantraॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा ॥
gyan mantraसदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥
bhakti mantraॐ श्री त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥