केतु नवग्रह मंत्र
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्॥
तंत्र-मंत्र की बाधाओं का नाश, अज्ञात और रहस्यमयी दुर्घटनाओं से प्राण रक्षा, और पारिवारिक या वैवाहिक जीवन में आ रहे आकस्मिक अलगाव (Detachment) या विच्छेदन को रोकने हेतु महर्षि व्यास का यह पौराणिक मंत्र
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तंत्र-मंत्र की बाधाओं का नाश, अज्ञात और रहस्यमयी दुर्घटनाओं से प्राण रक्षा, और पारिवारिक या वैवाहिक जीवन में आ रहे आकस्मिक अलगाव (Detachment) या विच्छेदन को रोकने हेतु महर्षि व्यास का यह पौराणिक मंत्र सिद्ध है। 13
इस मंत्र से क्या होगा?
तंत्र-मंत्र की बाधाओं का नाश, अज्ञात और रहस्यमयी दुर्घटनाओं से प्राण रक्षा, और पारिवारिक या वैवाहिक जीवन में आ रहे आकस्मिक अलगाव (Detachment) या विच्छेदन को रोकने हेतु महर्षि व्यास का यह पौराणिक मंत्र सिद्ध है
जाप विधि
नित्य सूर्यास्त के बाद या रात्रि के समय एक सौ आठ बार इस श्लोक का पाठ करें। 12
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प्रौं
naam mantraरोहिणेय
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gyan mantraइदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥
sabar mantraभैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2
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