चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ आप्यायस्व समेतु ते विश्वतः सोम वृष्णियम्। भवा वाजस्य संगथे।।
जीवन में रस, आकर्षण, शारीरिक तरलता (Bodily fluids) को संतुलित करने, गर्भाशय संबंधी रोगों के निवारण और मन में व्याप्त अज्ञात भयों को दूर कर सौम्य शांति की स्थापना हेतु। 19
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन में रस, आकर्षण, शारीरिक तरलता (Bodily fluids) को संतुलित करने, गर्भाशय संबंधी रोगों के निवारण और मन में व्याप्त अज्ञात भयों को दूर कर सौम्य शांति की स्थापना हेतु। 19
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन में रस, आकर्षण, शारीरिक तरलता (Bodily fluids) को संतुलित करने, गर्भाशय संबंधी रोगों के निवारण और मन में व्याप्त अज्ञात भयों को दूर कर सौम्य शांति की स्थापना हेतु
जाप विधि
सोमवार को रात्रिकाल में चंद्रोदय के पश्चात् श्वेत आसन पर बैठकर स्फटिक माला से ग्यारह हजार की संख्या के संकल्प के साथ जप करें। पूजन में सफेद पुष्प और अक्षत का प्रयोग अनिवार्य है। 19
विशेष टिप्पणियाँ
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