ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सूर्य

सूर्य नवग्रह मंत्र

ॐ घृणि सूर्याय नमः

सामान्य सूर्य दोष की दैनिक शांति, शारीरिक तेज व स्वास्थ्य में सुधार, सरकारी नौकरी के प्रयासों में आ रही बाधाओं का निवारण और विलंब से हो रहे राजकीय कार्यों की शीघ्र सिद्धि हेतु। 7

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सामान्य सूर्य दोष की दैनिक शांति, शारीरिक तेज व स्वास्थ्य में सुधार, सरकारी नौकरी के प्रयासों में आ रही बाधाओं का निवारण और विलंब से हो रहे राजकीय कार्यों की शीघ्र सिद्धि हेतु। 7

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सामान्य सूर्य दोष की दैनिक शांति, शारीरिक तेज व स्वास्थ्य में सुधार, सरकारी नौकरी के प्रयासों में आ रही बाधाओं का निवारण और विलंब से हो रहे राजकीय कार्यों की शीघ्र सिद्धि हेतु

जाप विधि

रविवार प्रातः स्नान के पश्चात् रुद्राक्ष की माला से सात हजार बार जप करना चाहिए। इसे नित्य पूजा में एक माला के क्रम में भी जपा जा सकता है। 7

विशेष टिप्पणियाँ

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सकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17

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धन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5