शनि नवग्रह मंत्र
ॐ काश्यपाय विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।
पिता-पुत्र के मध्य के विवादों का शमन, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति और अहंकार के नाश हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पिता-पुत्र के मध्य के विवादों का शमन, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति और अहंकार के नाश हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
पिता-पुत्र के मध्य के विवादों का शमन, पैतृक संपत्ति की प्राप्ति और अहंकार के नाश हेतु
जाप विधि
शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर एक सौ आठ बार जप। 16
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नासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
jap mantraॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
beej mantraद्रां
dhyan mantraॐ
ugra mantraॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
shanti mantraॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पुर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥