चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्।
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु
जाप विधि
नित्य एक सौ आठ बार संध्या के समय श्वेत आसन पर बैठकर जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रीमे ह्रौं क्षं क्षेत्रपालाय काल भैरवाय नमः
ugra mantraॐ अक्षय श्री छिन्नमस्ता देवी जगत निवासनी अदृश्य सिद्धि शून्य गमन विजयै मम सिद्धि देहि देहि प्राण देहि देहि मम अमुक गौत्र अमुक शर्मा ह गुरूत्वाकर्षण शक्ति नाशय शून्य सिद्धि प्राप्तर्थं शक्ति स्याद विनियोग
siddh mantraॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
naam mantraसोमनाथ
shanti mantraलोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
bhakti mantraॐ श्री रामः शरणं मम