चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नश्चन्द्रः प्रचोदयात्।
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
अमृत तत्व (दीर्घायु और निरोगी काया) की प्राप्ति, जल से संबंधित दुर्घटनाओं से बचाव तथा चंद्र गोचर के प्रतिकूल प्रभावों का शमन हेतु
जाप विधि
नित्य एक सौ आठ बार संध्या के समय श्वेत आसन पर बैठकर जप। 16
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