ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सूर्य

सूर्य नवग्रह मंत्र

ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।

बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु। 16

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु। 16

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु

जाप विधि

नित्य प्रातः काल सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके इक्कीस अथवा एक सौ आठ बार जप करें। इस गायत्री मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुद्धता के साथ मानसिक अथवा उपांशु (धीमे स्वर में) होना चाहिए। 16

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