सूर्य नवग्रह मंत्र
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्।
बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धि और विवेक का जागरण, सूर्य की नीच या मारक दशा के मारक प्रभाव को कम करने, सात्विक तेज की प्राप्ति और आत्मा की मलिनता को नष्ट कर शुद्ध ब्रह्मांडीय चेतना से जुड़ने हेतु
जाप विधि
नित्य प्रातः काल सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके इक्कीस अथवा एक सौ आठ बार जप करें। इस गायत्री मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुद्धता के साथ मानसिक अथवा उपांशु (धीमे स्वर में) होना चाहिए। 16
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