ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
केतु

केतु नवग्रह मंत्र

ॐ अश्वाध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।

शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु। 16

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु। 16

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु

जाप विधि

मंगलवार की रात्रि एक सौ आठ बार जप। 16

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

kavach mantra

श्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27

siddh mantra

ॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।

tantrik mantra

ॐ धूम्र लोचनी उग्र रूपिनी सकल विष्छेदिनी सकल विष संचय नाशय नाशय मारय मारय विषमज्वर ताप ज्वर शीत ज्वर वात ज्वर लूत ज्वर पयत्य ज्वर श्लेष्म ज्वर मोह ज्वर संदीपात ज्वर प्रेत ज्वर पिशाच ज्वर कृत्रिम ज्वर सकल रोग निवारिणी सकल ग्रह छेदिनी धूं धूं धूं धूं धूं धूमावती माम रक्षा रक्ष शीघ्रम शीघ्रमाच्छा गच्छ क्षिप्रमेव आरोग्यम कुरु कुरु हुम फट धूम धूम धूमावती स्वाहा

sabar mantra

गुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13

gyan mantra

सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥

naam mantra

श्रीमन नारायण