केतु नवग्रह मंत्र
ॐ अश्वाध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नः केतुः प्रचोदयात्।
शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
शूल (दर्द) और मज्जा संबंधी भयंकर पीड़ाओं का नाश, शत्रुओं द्वारा किए गए गुप्त प्रहारों से रक्षा हेतु
जाप विधि
मंगलवार की रात्रि एक सौ आठ बार जप। 16
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