ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
गुरु

गुरु नवग्रह मंत्र

ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

गुरु के मकर राशि (नीच) में होने, राहु के साथ गुरु-चांडाल योग बनाने पर उत्पन्न शिक्षा में गंभीर बाधा, विवाह में विलंब, यकृत (Liver), प्लीहा (Spleen) एवं मेद (Fat/Tumor) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण तथ

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

गुरु के मकर राशि (नीच) में होने, राहु के साथ गुरु-चांडाल योग बनाने पर उत्पन्न शिक्षा में गंभीर बाधा, विवाह में विलंब, यकृत (Liver), प्लीहा (Spleen) एवं मेद (Fat/Tumor) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण तथा भाग्य व उत्तम संतान सुख की प्राप्ति हेतु यह वैदिक मंत्र अचूक है। 2

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

गुरु के मकर राशि (नीच) में होने, राहु के साथ गुरु-चांडाल योग बनाने पर उत्पन्न शिक्षा में गंभीर बाधा, विवाह में विलंब, यकृत (Liver), प्लीहा (Spleen) एवं मेद (Fat/Tumor) संबंधी असाध्य रोगों के निवारण तथा भाग्य व उत्तम संतान सुख की प्राप्ति हेतु यह वैदिक मंत्र अचूक है

जाप विधि

गुरुवार को गुरु की होरा अथवा पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर मुख करके प्रारंभ करें। पीले आसन पर हल्दी, पीले चंदन या पुखराज की माला से चालीस दिनों के भीतर उन्नीस हजार मंत्रों का जप पूर्ण करें। पीपल वृक्ष की लकड़ी से दशांश हवन का विशेष विधान है। 7

विशेष टिप्पणियाँ

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