ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
सूर्य

सूर्य नवग्रह मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः॥

सूर्य की मारक महादशा या अंतर्दशा के भयंकर कष्टों का त्वरित शमन करने, प्रबल आत्मबल की प्राप्ति, शासकीय और कानूनी विवादों में विजय प्राप्त करने तथा शारीरिक ऊर्जा के गिरते स्तर को संतुलित करने हेतु यह ता

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनवग्रह मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सूर्य की मारक महादशा या अंतर्दशा के भयंकर कष्टों का त्वरित शमन करने, प्रबल आत्मबल की प्राप्ति, शासकीय और कानूनी विवादों में विजय प्राप्त करने तथा शारीरिक ऊर्जा के गिरते स्तर को संतुलित करने हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र जपा जाता है। 1

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सूर्य की मारक महादशा या अंतर्दशा के भयंकर कष्टों का त्वरित शमन करने, प्रबल आत्मबल की प्राप्ति, शासकीय और कानूनी विवादों में विजय प्राप्त करने तथा शारीरिक ऊर्जा के गिरते स्तर को संतुलित करने हेतु यह तांत्रोक्त बीज मंत्र जपा जाता है

जाप विधि

रविवार प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में लाल ऊनी या कुशा के आसन पर बैठकर तांबे के पात्र में जल रखकर पूर्व मुख होकर सात हजार बार जप का विधान है। माला रुद्राक्ष या माणिक्य की होनी चाहिए और चालीस दिन के संकल्प में नित्य संख्या में कमी नहीं आनी चाहिए। अंतिम दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर अनुष्ठान पूर्ण करें। 1

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