भगवान श्री विट्ठल (पांडुरंग) भक्ति मंत्र
ॐ जय हरि विट्ठल नमो नमः पंढरीनाथा नमो नमः
मन की असीम शांति, विट्ठल भगवान के प्रति वात्सल्य और प्रेम की गहन अनुभूति, और सांसारिक बंधनों से आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) 64।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मन की असीम शांति, विट्ठल भगवान के प्रति वात्सल्य और प्रेम की गहन अनुभूति, और सांसारिक बंधनों से आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष) 64।
इस मंत्र से क्या होगा?
मन की असीम शांति, विट्ठल भगवान के प्रति वात्सल्य और प्रेम की गहन अनुभूति, और सांसारिक बंधनों से आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष)
जाप विधि
इस मंत्र को पूर्ण भक्ति भाव से नेत्र बंद करके भगवान विट्ठल की ईंट पर खड़ी मूर्ति का मानसिक ध्यान करते हुए जपा जाता है 64। इसे समूह में ताल और वाद्य यंत्रों के साथ भी भावपूर्ण रूप से गाया या जपा जा सकता है 64।
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
kavach mantraऊरू रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृत्। जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तकः। पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामोऽखिलं वपुः। एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्। स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्। पातालभूतलव्योम- चारिणश्छद्मचारिणः। न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः। रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन्। नरो न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति। जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्। यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः। वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्। अव्याहताज्ञः सर्वत्र लभते जयमङ्गलम्। 34
beej mantraरां
ugra mantraह्रीं श्रीं हंसः ह्सौं स्वाहा
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
stotra mantraनारायणाखिलगुरो भगवन्नमस्ते ॥ 4