ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्री नारायण

भगवान श्री नारायण भक्ति मंत्र

ॐ नमो नारायणाय

इस मंत्र के निरंतर जप से जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का नाश होता है तथा परब्रह्म नारायण के प्रति शुद्ध भक्ति जागृत होती है 2। यह हृदय को स्थिर कर ईश्वरीय ऊर्जा से जोड़ता है, और निरंतर अभ्यास से यह पै

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारभक्ति मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

इस मंत्र के निरंतर जप से जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का नाश होता है तथा परब्रह्म नारायण के प्रति शुद्ध भक्ति जागृत होती है 2। यह हृदय को स्थिर कर ईश्वरीय ऊर्जा से जोड़ता है, और निरंतर अभ्यास से यह पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर मस्तिष्क के डिफॉल्ट मोड नेटवर्क को शांत करता है, जिससे अस्तित्व संबंधी चिंताओं का नाश होकर गहरी आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है 1।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस मंत्र के निरंतर जप से जन्म-जन्मांतर के संचित पापों का नाश होता है तथा परब्रह्म नारायण के प्रति शुद्ध भक्ति जागृत होती है 2

02

यह हृदय को स्थिर कर ईश्वरीय ऊर्जा से जोड़ता है, और निरंतर अभ्यास से यह पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर मस्तिष्क के डिफॉल्ट मोड नेटवर्क को शांत करता है, जिससे अस्तित्व संबंधी चिंताओं का नाश होकर गहरी आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है

जाप विधि

इस अष्टाक्षर नाम-मंत्र का जप ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग ९० मिनट पूर्व) में या किसी भी शुद्ध और शांत अवस्था में किया जाना चाहिए 1। जप के लिए एक सौ आठ मनकों वाली तुलसी या स्फटिक की माला का उपयोग सर्वाधिक प्रामाणिक माना गया है, जिसे दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली पर रखकर अंगूठे से अपनी ओर खींचा जाता है 1। इस प्रक्रिया में अहंकार की प्रतीक तर्जनी उंगली का स्पर्श माला से पूर्णतः वर्जित है 1। माला के मनकों के मध्य ग्रंथि (गांठ) होना अनिवार्य है जिससे मंत्र की ऊर्जा सुरक्षित रहे और तरंगों का विस्फोट होकर सिद्धि प्राप्त हो सके 3। सुमेरु (१०८वें मनके) को लांघना निषिद्ध है, अतः चक्र पूर्ण होने पर माला को पलट कर नया चक्र आरंभ करना चाहिए 1। इसे वाचिक (स्वर के साथ), उपांशु (फुसफुसाते हुए) या मानसिक (मौन) रूप से जपा जा सकता है 1।

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