भगवान हयग्रीव (सर्वविद्या आधार स्वरूप) ज्ञान मंत्र
ज्ञानम् आनंद मयं देवं निर्मल स्पटिकाकृतिम् । आधारं सर्व विद्यानां हयग्रीवं उपास्मे ॥
अज्ञान का समूल नाश, आनंदमयी विद्या की प्राप्ति और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास 15।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञान का समूल नाश, आनंदमयी विद्या की प्राप्ति और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास 15।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान का समूल नाश, आनंदमयी विद्या की प्राप्ति और स्मरण शक्ति का तीव्र विकास
जाप विधि
अध्ययन आरम्भ करने से पूर्व भगवान का ध्यान करते हुए पाठ 15।
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ॐ श्री हनुमते नमः
vaidik mantraॐ अग्निः पूर्वेभिर्ऋषिभिरीड्यो नूतनैरुत । स देवाँ एह वक्षति ॥
kaamya mantraॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।
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shanti mantraॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मे अस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा