भगवान श्री जगन्नाथ भक्ति मंत्र
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः
परब्रह्म स्वरूप भगवान जगन्नाथ की वंदना कर उनकी पूर्ण कृपा प्राप्त करना, जीवन में आध्यात्मिक शांति, और आंतरिक शक्ति (आत्मबल) की प्रबल जागृति 72।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
परब्रह्म स्वरूप भगवान जगन्नाथ की वंदना कर उनकी पूर्ण कृपा प्राप्त करना, जीवन में आध्यात्मिक शांति, और आंतरिक शक्ति (आत्मबल) की प्रबल जागृति 72।
इस मंत्र से क्या होगा?
परब्रह्म स्वरूप भगवान जगन्नाथ की वंदना कर उनकी पूर्ण कृपा प्राप्त करना, जीवन में आध्यात्मिक शांति, और आंतरिक शक्ति (आत्मबल) की प्रबल जागृति
जाप विधि
इस श्लोक-मंत्र का जप प्रतिदिन की पूजा में या रथयात्रा के विशेष अवसर पर किया जाता है 72। इसे शांत चित्त से भगवान जगन्नाथ की मूर्ति या चित्र के सम्मुख बैठकर स्फटिक या तुलसी की माला से १०८ बार जपना उत्तम है 72।
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sabar mantraओम नमो महादेवी सर्व कार्य सिद्धि करनी जो पाती पूरे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा 3
beej mantraखं
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
kavach mantraश्रीम क्लीम सरस्वती बुद्ध जन्य स्वाहा सततम मंत्र राजोयम दक्षिणे मां सदावतु ऐम ह्रीम श्रीम क्लीम त्र्यक्षरो मंत्रो नैऋत्यम सर्वदावतु ओम ऐकवासिन्य स्वाहा मां वारुणेवतु ओम सर्वांबिकाय स्वाहा वायव्यमा सदावतु ओम ऐम श्रीम क्लीम गद्यवासिन्य स्वाहा माम उत्तरेवतु ऐम सर्वशास्त्र वासिन्ये स्वाहान्य सदा ओम ह्रीम सर्व पूजिता स्वाहा चोरध्वं सदावतु ओम ह्रीम पुस्तक वासिन्य स्वाहा धोमांम सदावतु ओम ग्रंथ बीज स्वरूपाय स्वाहा मां सर्वतो वतु इति कथित विप्र ब्राह्म मंत्र विग्रहम इदम विश्व जयं नाम कवचम ब्रह्म रूपकम पंचलक्ष जपे नैव सिद्धमु कवचम भवे यदि सिद्ध कवचो बृहस्पति समो भवे महा वाग्मी कविंद्र त्रैलोक्य विजयी भवेत 27
kaamya mantraज्ञानानन्दमयं देवं निर्मलस्फटिकाकृतिम्। आधारं सर्वविद्यानां हयग्रीवमुपास्महे॥