अग्नि / आग्नेय काण्ड (१.१.९) वैदिक मंत्र
ॐ त्वामग्ने पुष्करादध्यथर्वा निरमन्थत । मूर्ध्नो विश्वस्य वाघतः ॥
ब्रह्माण्ड के धारक सर्वोच्च तेज की उत्पत्ति, जड़ता का नाश एवं जीवन में ज्ञान-रूपी प्रकाश का प्रकटीकरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
ब्रह्माण्ड के धारक सर्वोच्च तेज की उत्पत्ति, जड़ता का नाश एवं जीवन में ज्ञान-रूपी प्रकाश का प्रकटीकरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्माण्ड के धारक सर्वोच्च तेज की उत्पत्ति, जड़ता का नाश एवं जीवन में ज्ञान-रूपी प्रकाश का प्रकटीकरण
जाप विधि
यज्ञीय अरणि-मंथन (काष्ठ से अग्नि उत्पन्न करने की प्रक्रिया) के समय ऋत्विजों द्वारा सम्मिलित स्वर में गान।
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mool mantraॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः
gyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥