भगवान श्री कृष्ण (बाल स्वरूप) भक्ति मंत्र
गोपाला गोपाला देवकीनन्दन गोपाला
हृदय में वात्सल्य और शुद्ध निःस्वार्थ प्रेम की उत्पत्ति, मानसिक क्लेशों व चिंताओं से पूर्ण मुक्ति, और भगवान के बाल स्वरूप (देवकीनंदन) के प्रति अगाध समर्पण भाव की प्राप्ति 17।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
हृदय में वात्सल्य और शुद्ध निःस्वार्थ प्रेम की उत्पत्ति, मानसिक क्लेशों व चिंताओं से पूर्ण मुक्ति, और भगवान के बाल स्वरूप (देवकीनंदन) के प्रति अगाध समर्पण भाव की प्राप्ति 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
हृदय में वात्सल्य और शुद्ध निःस्वार्थ प्रेम की उत्पत्ति, मानसिक क्लेशों व चिंताओं से पूर्ण मुक्ति, और भगवान के बाल स्वरूप (देवकीनंदन) के प्रति अगाध समर्पण भाव की प्राप्ति
जाप विधि
संत परंपरा में इस नाम-मंत्र का जप शुद्ध वात्सल्य भाव के साथ किया जाता है 17। इसे प्रतिदिन प्रातः और सांध्य वेला में स्फटिक या तुलसी की माला पर १०८ बार जपा जा सकता है, अथवा श्वास के साथ मानसिक रूप से जोड़ा जा सकता है 4। जप के दौरान भगवान कृष्ण के अत्यंत मोहक बाल स्वरूप का मानसिक ध्यान करना अनिवार्य है।
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