एकादश रुद्र (चण्ड रुद्र) मूल मंत्र
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्
तेज और ओज में असीमित वृद्धि, गुप्त एवं प्रत्यक्ष शत्रुओं का कठोर दमन तथा समाज में वर्चस्व की स्थापना 7।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
तेज और ओज में असीमित वृद्धि, गुप्त एवं प्रत्यक्ष शत्रुओं का कठोर दमन तथा समाज में वर्चस्व की स्थापना 7।
इस मंत्र से क्या होगा?
तेज और ओज में असीमित वृद्धि, गुप्त एवं प्रत्यक्ष शत्रुओं का कठोर दमन तथा समाज में वर्चस्व की स्थापना
जाप विधि
एकांत स्थान पर रुद्राक्ष की माला से उग्र एकाग्रता के साथ जप करें 7।
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ॐ ह्ल्रीं ह्ल्रीं उग्र तारे क्रीं क्रीं फट्
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
naam mantraचिंतामणि
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shanti mantraॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
gyan mantraअहं ब्रह्मास्मि