राहु मूल मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (सामान्य मूल: ॐ राहवे नमः)
मानसिक भ्रम का नाश, राहु महादशा के दुष्प्रभावों की शांति, आकस्मिक धन लाभ, राजनीतिक सफलता एवं अतीन्द्रिय क्षमता (Charisma) का विकास 47।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
मानसिक भ्रम का नाश, राहु महादशा के दुष्प्रभावों की शांति, आकस्मिक धन लाभ, राजनीतिक सफलता एवं अतीन्द्रिय क्षमता (Charisma) का विकास 47।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक भ्रम का नाश, राहु महादशा के दुष्प्रभावों की शांति, आकस्मिक धन लाभ, राजनीतिक सफलता एवं अतीन्द्रिय क्षमता (Charisma) का विकास
जाप विधि
शनिवार या बुधवार की रात्रि में नीले वस्त्र पर बैठकर दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष या अष्टधातु माला से जप करें। अनुष्ठान में १८,००० की संख्या निर्धारित है 47।
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kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः
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navgrah mantraअर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम्। सिंहिकागर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
siddh mantraॐ ह्रीं द्रां दत्तात्रेय हरेकृष्ण उन्मत्तानन्द दायक दिगम्बर । मुने बाल पिशाच ज्ञान सागर द्रां ह्रीं ॐ ॥