भगवती नारायणी काम्य मंत्र
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥
सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा
जाप विधि
सम्पुटित पाठ अथवा विपत्ति काल में निरन्तर जप 28।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
मेघश्यामं पीतकौशेयवासं श्रीवत्साङ्कं कौस्तुभोद्भासिताङ्गम् । पुण्योपेतं पुण्डरीकायताक्षं विष्णुं वन्दे सर्वलोकैकनाथम् ॥ 12
vaidik mantraॐ आ ते वत्सो मनो यमत्परमाच्चित्सधस्थात् । अग्ने त्वां कामये गिरा ॥
shanti mantraॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः । स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवागँसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायूः । स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः । स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः । स्वस्ति नस्ताक्षर्यो अरिष्टनेमिः । स्वस्ति नो वृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
naam mantraतारकारि
navgrah mantraदेवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
bhakti mantraॐ नमो नारसिंहाय