ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवती नारायणी

भगवती नारायणी काम्य मंत्र

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र। दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम्॥

सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा 28।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारकाम्य मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा 28।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्प, चोर, डाकू, अग्नि और जल जैसी विविध प्राकृतिक व मानवनिर्मित विपत्तियों एवं उपद्रवों से रक्षा

जाप विधि

सम्पुटित पाठ अथवा विपत्ति काल में निरन्तर जप 28।

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