भगवती चण्डिका काम्य मंत्र
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
विश्व की रक्षा, सर्वत्र सुरक्षा और घोर आपदाओं से समाज की रक्षा 28।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
विश्व की रक्षा, सर्वत्र सुरक्षा और घोर आपदाओं से समाज की रक्षा 28।
इस मंत्र से क्या होगा?
विश्व की रक्षा, सर्वत्र सुरक्षा और घोर आपदाओं से समाज की रक्षा
जाप विधि
श्री दुर्गा सप्तशती के प्रत्येक श्लोक के आदि और अंत में इस मंत्र का सम्पुट लगाकर १४०० बार पाठ करें 28।
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वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥
vaidik mantraॐ अग्निजिह्वा मनव: सूरचक्षसो विश्वे नो देवा अवसागमन्निह ।
stotra mantraयथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्। भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया। 7
navgrah mantraॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्।
bhakti mantraॐ श्री त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा