ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
महा प्रत्यंगिरा देवी (मूल अस्त्र मंत्र) तांत्रिक

महा प्रत्यंगिरा देवी (मूल अस्त्र मंत्र) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र

ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा

सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस 67।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस 67।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस

जाप विधि

संकल्प लेकर 10,000 बार पूर्ण एकाग्रता से जप। तत्पश्चात् तिल और राई के मिश्रण से 1000 आहुतियों का होम अनिवार्य है। अशुद्ध अवस्था में इसका जप पूर्णतः वर्जित है। अष्टमी, अमावस्या या पूर्णिमा की रात्रि विशेष फलदायी है 66।

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