महा प्रत्यंगिरा देवी (मूल अस्त्र मंत्र) तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस 67।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस 67।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्व भूत-प्रेत और जादू-टोना का पूर्ण विनाश, असाध्य रोगों का नाश तथा शत्रुओं द्वारा किए गए किसी भी मारण कर्म का विध्वंस
जाप विधि
संकल्प लेकर 10,000 बार पूर्ण एकाग्रता से जप। तत्पश्चात् तिल और राई के मिश्रण से 1000 आहुतियों का होम अनिवार्य है। अशुद्ध अवस्था में इसका जप पूर्णतः वर्जित है। अष्टमी, अमावस्या या पूर्णिमा की रात्रि विशेष फलदायी है 66।
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kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
ugra mantraॐ नमो महादेव को काला भैरव काली रात भैरव चले अमावसरा आगे भैरव पीछे भैरव बाएं भैरव बाएं भैरव ऊपर पर आकाश भैरव नीचे पाताल भैरव पांच कोष पूरब बांध पांच कोष पश्चिम बांध पांच कोष उत्तर पांच कोष दक्षिण बांध जल थल वन गिरी गुफा बांध सात लोक सात पाताल नौ खंड बांध घर बांध दरवाजा बांध डाकनी साकनी पिशाचनी बांध भूत प्रेत वैताल खबीस चुड़ैल बांध मरघट कोशान शमशान की राख हवेरी की विद्या घोर क्रिया बांध भैरव की जंजीर चले हर बुरी बला दुष्ट शक्ति को बांध मृत्यु का भय काल की छाया समय की रेखा मंत्र की शक्ति तंत्र को प्रहार हाथ का खप्पर शत्रु का अस्त्रघात बांध हर बुरी बला दुष्ट शत्रु से रक्षा कर लीला ऐसा मार्ग खोले ना खुले जो खोले भैरव करंड से शत्रु नरक को जाए भाई शिव शंकर की दुहाई मदाकारी की ओम भैरवाय नमः
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