चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।
कुंडली में केमद्रुम योग, विष योग (शनि-चंद्र युति), या चंद्र के वृश्चिक राशि (नीच) में होने से उत्पन्न भयंकर मानसिक अवसाद, श्वास एवं कफ जनित रोगों से मुक्ति तथा भावनाओं के समग्र संतुलन हेतु। यह वैदिक म
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कुंडली में केमद्रुम योग, विष योग (शनि-चंद्र युति), या चंद्र के वृश्चिक राशि (नीच) में होने से उत्पन्न भयंकर मानसिक अवसाद, श्वास एवं कफ जनित रोगों से मुक्ति तथा भावनाओं के समग्र संतुलन हेतु। यह वैदिक मंत्र माता के स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति की स्थापना के लिए अचूक है। 1
इस मंत्र से क्या होगा?
कुंडली में केमद्रुम योग, विष योग (शनि-चंद्र युति), या चंद्र के वृश्चिक राशि (नीच) में होने से उत्पन्न भयंकर मानसिक अवसाद, श्वास एवं कफ जनित रोगों से मुक्ति तथा भावनाओं के समग्र संतुलन हेतु
यह वैदिक मंत्र माता के स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति की स्थापना के लिए अचूक है
जाप विधि
सोमवार को चंद्र की होरा, अथवा रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में सायं या रात्रिकाल में उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा की ओर मुख करके अनुष्ठान जप आरंभ करें। स्फटिक या मोती की एक सौ आठ मनकों वाली माला से चालीस दिनों के भीतर ग्यारह हजार मंत्रों का जप पूर्ण करना शास्त्रसम्मत है। अनुष्ठान के पूर्ण होने पर पलाश (ढाक) की समिधा से दशांश हवन करें। 1
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