अघोर भैरव (शाबर उग्र क्रिया) उग्र मंत्र
ॐ नमो महादेव को काला भैरव काली रात भैरव चले अमावसरा आगे भैरव पीछे भैरव बाएं भैरव बाएं भैरव ऊपर पर आकाश भैरव नीचे पाताल भैरव पांच कोष पूरब बांध पांच कोष पश्चिम बांध पांच कोष उत्तर पांच कोष दक्षिण बांध जल थल वन गिरी गुफा बांध सात लोक सात पाताल नौ खंड बांध घर बांध दरवाजा बांध डाकनी साकनी पिशाचनी बांध भूत प्रेत वैताल खबीस चुड़ैल बांध मरघट कोशान शमशान की राख हवेरी की विद्या घोर क्रिया बांध भैरव की जंजीर चले हर बुरी बला दुष्ट शक्ति को बांध मृत्यु का भय काल की छाया समय की रेखा मंत्र की शक्ति तंत्र को प्रहार हाथ का खप्पर शत्रु का अस्त्रघात बांध हर बुरी बला दुष्ट शत्रु से रक्षा कर लीला ऐसा मार्ग खोले ना खुले जो खोले भैरव करंड से शत्रु नरक को जाए भाई शिव शंकर की दुहाई मदाकारी की ओम भैरवाय नमः
दुष्ट शक्ति, डाकनी, पिशाचनी, भूत-प्रेत को पूर्णतः बांधना, मृत्यु भय निवारण, शत्रु का अस्त्रघात से रक्षण व शत्रु का नरक गमन 22।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
दुष्ट शक्ति, डाकनी, पिशाचनी, भूत-प्रेत को पूर्णतः बांधना, मृत्यु भय निवारण, शत्रु का अस्त्रघात से रक्षण व शत्रु का नरक गमन 22।
इस मंत्र से क्या होगा?
दुष्ट शक्ति, डाकनी, पिशाचनी, भूत-प्रेत को पूर्णतः बांधना, मृत्यु भय निवारण, शत्रु का अस्त्रघात से रक्षण व शत्रु का नरक गमन
जाप विधि
अघोर क्रिया के अंतर्गत श्मशान की राख का प्रयोग कर, गुरु आज्ञा से ग्रहण काल या अमावस्या की मध्यरात्रि को श्मशान या अत्यंत निर्जन स्थान में 1008 बार जप कर सिद्ध किया जाता है 22।
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