माँ मुखकमलवासिनी सरस्वती ज्ञान मंत्र
ॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति
जाप विधि
पवित्र अवस्था में विद्या और ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु जप 4।
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ॐ नमो नारायणाय
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
beej mantraहूँ
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं असितांग भैरवाय नमः
dhyan mantraया कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
stotra mantraस वै न देवासुरमर्त्यतिर्यंग न स्त्री न षण्डो न पुमान न जन्तुः । नायं गुणः कर्म न सन्न चासन निषेधशेषो जयतादशेषः ॥ 4