माँ मुखकमलवासिनी सरस्वती ज्ञान मंत्र
ॐ अर्हं मुखकमलवासिनी पापात्मक्षयंकारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ॥
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
पाप-कर्मों का क्षय, वाणी में शुद्धता एवं प्रभाव, तथा विद्या-ऐश्वर्य की प्राप्ति
जाप विधि
पवित्र अवस्था में विद्या और ऐश्वर्य प्राप्ति हेतु जप 4।
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beej mantraबं, भं, मं, यं, लं, रं
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