माता महालक्ष्मी / महालक्ष्मी अष्टकम् (फलश्रुति) स्तोत्र मंत्र
महालक्ष्म्यष्टक स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः । सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोतिसर्वदा ॥ एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् । द्विकालंयःपठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥ त्रिकालं यःपठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् । महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यंप्रसन्न वरदा शुभा ॥ 29
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश 29।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश 29।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश
जाप विधि
नियमित रूप से पूर्ण श्रद्धा के साथ एक, दो या तीन काल (सुबह, दोपहर, शाम) में पाठ करें 29।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4
jap mantraॐ नमो नृसिंहाय हिरण्यकश्यप-वक्ष-स्थल-विदारणाय त्रिभुवनव्यापकाय भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी कुलोन्मूल नाशाय स्तम्भोद्भवाय समस्तदोषान् हर-हर विसर-विसर पच-पच-हन-हन-कम्पय-कम्पय मथ-मथ ह्रीं ह्रीं फट् फट् एह्येहि रुद्र आज्ञापयति स्वाहा
beej mantraक्रां
dhyan mantraविशोका वा ज्योतिष्मती
ugra mantraॐ ह्रीं ह्रीं हूं हूं क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा
shanti mantraॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥