ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
भगवान श्रीविष्णु / श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् (ध्यानम्)

भगवान श्रीविष्णु / श्रीविष्णुसहस्रनाम स्तोत्रम् (ध्यानम्) स्तोत्र मंत्र

छायायां पारिजातस्य हेमसिंहासनोपरि आसीनमम्बुदश्याममायताक्षमलंकृतम्। चन्द्राननं चतुर्बाहुं श्रीवत्साङ्कित वक्षसं रुक्मिणी सत्यभामाभ्यां सहितं कृष्णमाश्रये ॥ 12

मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारस्तोत्र मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण 11।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मानसिक शांति, दुखों का समाधान, आध्यात्मिक उन्नति, कर्मों का फल और शुभ ऊर्जा का आकर्षण

जाप विधि

स्नानादि के पश्चात् शुद्ध वस्त्र धारण कर एकांत में पूर्ण श्रद्धा के साथ प्रातः या सायं पाठ करें। विशेष इच्छा पूर्ति हेतु 21 दिनों तक प्रतिदिन 51 पाठ का विधान है 2।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

ugra mantra

ॐ नमो महादेव को काला भैरव काली रात भैरव चले अमावसरा आगे भैरव पीछे भैरव बाएं भैरव बाएं भैरव ऊपर पर आकाश भैरव नीचे पाताल भैरव पांच कोष पूरब बांध पांच कोष पश्चिम बांध पांच कोष उत्तर पांच कोष दक्षिण बांध जल थल वन गिरी गुफा बांध सात लोक सात पाताल नौ खंड बांध घर बांध दरवाजा बांध डाकनी साकनी पिशाचनी बांध भूत प्रेत वैताल खबीस चुड़ैल बांध मरघट कोशान शमशान की राख हवेरी की विद्या घोर क्रिया बांध भैरव की जंजीर चले हर बुरी बला दुष्ट शक्ति को बांध मृत्यु का भय काल की छाया समय की रेखा मंत्र की शक्ति तंत्र को प्रहार हाथ का खप्पर शत्रु का अस्त्रघात बांध हर बुरी बला दुष्ट शत्रु से रक्षा कर लीला ऐसा मार्ग खोले ना खुले जो खोले भैरव करंड से शत्रु नरक को जाए भाई शिव शंकर की दुहाई मदाकारी की ओम भैरवाय नमः

kaamya mantra

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

shanti mantra

ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

vaidik mantra

ॐ यत्प्रज्ञानमुत चेतो धृतिश्च यज्ज्योतिरन्तरमृतं प्रजासु । यस्मान्न ऋते किंचन कर्म क्रियते तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

dhyan mantra

कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥

mool mantra

ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः