गुरु नवग्रह मंत्र
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः॥
गुरु महादशा के मारक दुष्प्रभावों को नष्ट करने, आध्यात्मिक उन्नति, परम ज्ञान, दर्शन (Philosophy) की समझ और जीवन में असीमित धन व ऐश्वर्य के संचय हेतु इस तांत्रोक्त बीज मंत्र का उपयोग होता है। 9
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुरु महादशा के मारक दुष्प्रभावों को नष्ट करने, आध्यात्मिक उन्नति, परम ज्ञान, दर्शन (Philosophy) की समझ और जीवन में असीमित धन व ऐश्वर्य के संचय हेतु इस तांत्रोक्त बीज मंत्र का उपयोग होता है। 9
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु महादशा के मारक दुष्प्रभावों को नष्ट करने, आध्यात्मिक उन्नति, परम ज्ञान, दर्शन (Philosophy) की समझ और जीवन में असीमित धन व ऐश्वर्य के संचय हेतु इस तांत्रोक्त बीज मंत्र का उपयोग होता है
जाप विधि
गुरुवार प्रातः स्नान के पश्चात् पीले वस्त्र धारण कर हल्दी या पुखराज की माला से उन्नीस हजार बार चालीस दिनों में जप पूर्ण करें। भगवान विष्णु या केले के वृक्ष का पूजन अत्यंत लाभकारी है। 9
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ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः ॥
mool mantraॐ रुद्राय रोगनाशाय अगच्छ च राम ॐ नमः
jap mantraॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः
kaamya mantraविधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
kavach mantraस्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
sabar mantraओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1